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लोकल फॉर वोकल ही आएगा देश के काम -पियूष गोयल

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दिल्ली। जहाँ एक तरफ महायुद्ध के चलते शेयर बाजार में गिरावट नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने उद्योग जगत से घरेलू कंपनियों को पूरी तरह मदद देने का आह्वान किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान और कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा है कि कंपनियों को भारतीय उत्पाद भले ही थोड़ा महंगा पड़े, लेकिन उन्हें आयात के मुकाबले घरेलू खरीद को प्राथमिकता देनी चाहिए और राष्ट्रीयता की भावना का पूरा ख्याल रखना चाहिए।

वाणिज्य मंत्री ने घरेलू कंपनियों को मैन्यूफैक्चरिंग में एक-दूसरे की मदद करने और स्थानीय कंपनियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। वाणिज्य मंत्री का कहना था कि कोरिया और जापान के उद्योग भारत से स्टील का आयात नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे स्थानीय स्टील कंपनियों से यह उत्पाद खरीद रहे हैं। जापान की कंपनियों को भले ही स्थानीय स्टील 100 डालर प्रति टन महंगा पड़े, लेकिन वे आयात नहीं कर रहीं, बल्कि स्थानीय कंपनियों से खरीदारी कर उन्हें बढ़ावा दे रही हैं।

सिंगल विंडो की दिक्कत बताएं- वाणिज्य मंत्री के अनुसार यह सब राष्ट्रीयता की भावना से पैदा होता है। मुझे लगता है कि हमें भी एक-दूसरे की मदद और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। बड़ी कंपनियों को एमएसएमई सेक्टर से ज्यादा से ज्यादा खरीदारी करनी चाहिए और उन्हें समय पर भुगतान भी करना चाहिए। वाणिज्य मंत्री ने नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) के बारे में कहा कि कारोबारी इसका भरपूर उपयोग नहीं कर रहे हैं और यह निराशाजनक बात है। उनका कहना था कि इस माध्यम पर पंजीकरण करने या अनुमोदन मांगने वाले लोगों की संख्या को देखकर उन्हें निराशा होती है। बेहतर होगा कि अधिक से अधिक लोग इसका उपयोग करें और सरकार को इसकी खामियों के बारे में बताएं।

तिलहन खेती बढ़ाने के प्रयास जारी– खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का भी कार्यभार संभाल रहे गोयल ने कहा कि धान के रकबा में जो करीब चार लाख हेक्टेयर की कमी आई है, उसका उपयोग 10 राज्यों के 100 जिलों में तिलहन खेती में किया जाएगा। इससे खाद्य तेलों का आयात घटेगा। बीते अक्टूबर में खत्म मार्केटिंग वर्ष के दौरान भारत ने 1.17 लाख करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य तेलों का आयात किया था।



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