उत्तराखंड

मोबाइल फोन में ऐप डाउनलोड करवाकर जानिए कैसे उड़ाए रुपये, ये बरतें सावधानियां

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देहरादून। साइबर ठग अब एटीएम कार्ड या सीसीवी पूछने की बजाय एनी डेस्क ऐप से लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा रहे हैं। दून में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसलिए लोगों को सावधान हो जाना चाहिए। पुलिस भी लोगों से अपील कर रही है। दरअसल, साइबर ठगों ने विभिन्न ई-वॉलेट और बैंकों के कस्टमर केयर के तौर पर इंटरनेट पर अपने नंबर डाल दिए हैं।
इसके अलावा लोगों के मोबाइल पर सिम की केवाईसी या कमाई का मैसेज भेजकर भी संपर्क करते हैं। लोग जब ठगों से फोन के जरिये संपर्क में आते हैं तो ठग, बैंक या कंपनी कर्मचारी की तरह व्यवहार करते हैं। वे सीधे कोई जानकारी तो नहीं लेते हैं, लेकिन लोगों के मोबाइल पर एनी डेस्क ऐप डाउनलोड करवा देते हैं।इसके बाद मोबाइल का एक्सेस लेकर मामूली पेमेंट डेबिट-क्रेडिट कार्ड से करने को कहते हैं।
लोग पेमेंट करने के लिए उनके बताए पोर्टल पर जाते हैं, वहां खाते की जानकारी दर्ज करते ही साइबर ठग एनी डेस्क ऐप से पूरा ब्योरा नोट कर लेते हैं। इसके बाद लोगों के खाते की रकम ट्रांसफर कर लेते हैं। रिटायर स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रमेश चंद्र आर्य और आईटीबीपी के सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार समेत  सैकड़ों लोग इस तरह ठगी का शिकार हो चुके हैं।
ठगी से बचने के लिए ये सावधानियां बरतें
-अपने मोबाइल में किसी अंजान के कहने पर ऐप डाउनलोड न करें।
-साइबर क्राइम या ठगी होने पर तुरंत 155260 नंबर पर कॉल करें।
-किसी भी क्यूआर कोड और यूपीआई पिन का उपयोग सिर्फ पेमेंट करने के लिए होता है, राशि प्राप्त करने के लिए नहीं। ठग आजकल क्यूआर कोड भेजकर भी ठगी कर रहे हैं।
-अनचाहे मैसेज लिंक को ओपन न करें, ना ही ओटीपी शेयर करें।
-बैंक एसएमएस अलर्ट ऑन हो, ताकि ट्रांजेक्शन का अपडेट मिलता रहे।
-एटीएम पिन एवं इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी से साझा न करें एवं समय-समय पर बदलते रहें।
-ऑनलाइन शॉपिंग में लेन-देन की मैक्सिमम लिमिट को कम रखें, जैसे 10 हजार  या 20 हजार रुपए।
-सेविंग्स अकाउंट से स्वाइप या ऑनलाइन शॉपिंग करने से बचें, ऑनलाइन पेमेंट के लिए अलग बैंक खाते का इस्तेमाल करें और उसमें उतना ही पैसा रखें जितने की शॉपिंग करनी हो ।
-अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, अनजान व्यक्ति द्वारा कोड, ओटीपी या पिन पूछने पर न बताएं।
-किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने मोबाइल में किसी भी तरह के एप्लिकेशन इंस्टाल करने से बचें।
-गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च न करें, सिर्फ ऑफिशियिल वेबसाइट पर ही सर्च करें।
-ऑफर , कैशबैक या डिस्काउंट आदि के लिए कूपन कोड या अन्य किसी लालच में फंसने से बचें ।
-विश्वसनीय वेबसाइट अथवा एप से ही शॉपिंग करें, एडवांस पेमेंट से बचें।
-ऑफर्स और स्किम से जुड़े ईमेल एवं लिंक्स पर क्लिक करने से बचें। (एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार।)
साइबर ठग लोगों की लापरवाही का फायदा उठाकर उनका खाता खाली कर देते हैं। मोबाइल पर केवाईसी या इस तरह का कोई औक मैसेज आए तो उस पर भरोसा न करें। किसी बैंक या ई-वॉलेट से जुड़ी मदद लेनी है तो उनकी आधिकारिक साइट से टोल फ्री नंबर लें। नेट पर कस्टमर केयर के रूप में मिलने वाले मोबाइल नंबरों पर भरोसा न करें।
जन्मेजय खंडूरी, डीआईजी, देहरादून  



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