उत्तराखंड

आधुनिकता की दौड़ में महिलाएं अपने संस्कारों एवं कर्तव्यों को भूल रही हैं : बलूनी

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देहरादून। आजादी के 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में उत्तरांचल महिला एसोसिएशन उमा की ओर से महिलाओं का जमाना (नया, पुराना), क्या खोया, क्या पाया पर विचार गोष्ठी एवं फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय नारी नए और पुराने जमाने की थीम थी। रविवार को एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी और सामाजिक कार्यकर्ता सुनील अग्रवाल एवं नीलम अग्रवाल रहे। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने में कोई बुराई नहीं। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में महिलाएं अपने संस्कारों एवं कर्तव्यों को भूल रही हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। जब तक महिलाएं वित्तीय रूप से स्वतंत्र नहीं होती, उनके लिए राजनैतिक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं।

आज भी संपत्ति में पुरुषों का ही नाम होता है। उमा की अध्यक्ष साधना शर्मा ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी महिलाओं की आधी आबादी को पुरुषों के साथ बराबरी का हक नहीं मिल पाया है, उनकी स्थिति आज भी चिंतनीय है। शहर की कुछ ही साधन संपन्न महिलाएं आगे बढ़ पाई हैं। जबकि ग्रामीण व पिछडे क्षेत्र की महिलाएं आज भी आजादी के पूर्व की स्थिति में जी रही हैं। मीनाक्षी शर्मा ने वंदेमातरम, श्रेया एवं दिशा ने गणेश वंदना की। दून विवि की प्राची पाठक, अंजना वाही, डॉ०  नीलम प्रभा वर्मा, सुशीला बलूनी, रीता गोयल ने नए और पुराने जमाने की महिलाओं के बारे में अपने विचार विस्तार से रखे। नम्रता वर्मा, वंदना भट्ट, संगीता लखेड़ा ने समूह नृत्य की प्रस्तुति दी। फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता में अलिशा, अमिता, विजया बिष्ट, मनीषा नेगी, पुष्पा भल्ला, रीता जोरावर, मेनका बहल, स्वाति चौहान, कल्पना जोशी, अर्चना सिंघल, शशि शर्मा, रवीना लखेड़ा, ममता गोयल, ऊषा, नम्रता वर्मा, संगीता लखेडा, वंदना, मधु राय, प्रभा सलूजा, अनीता सकलानी ने प्रतिभाग कर एक से बढ़कर एक ड्रेस का प्रदर्शन किया। कल्पना जोशी, अर्चना सिंघल, शशि शर्मा, रीता जोरावर ने शानदार नृत्य की प्रस्तुति दी। संचालन अर्चना शर्मा ने किया।



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