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5 सालो में विकास भले धीरे हुआ हो लेकिन नेताओ की सम्पति काफी रफ्तार से बढ़ी है

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उत्तराखंड। भले ही प्रदेश में विकास की रफ्तार सुस्त हो, लेकिन यहां के नेताओं की सपंत्ति दिन दूनी-रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। इसका खुलासा नेताओं द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए गए शपथ पत्र में हो रहा है। महज 5 सालों में कई नेताओं की संपत्ति में करोड़ों की बढ़ोत्तरी हुई है।

कोरोना काल में देश-दुनिया में भले ही मंदी छाई रही हो। उद्योग धंधे से लेकर हर सेक्टर नुकसान में रहा हो, लेकिन नेतागिरी ही एक ऐसा काम है जो कभी मंदा नहीं पड़ा। राजनेताओं की बढ़ती संपत्ति को देखकर तो कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है। इन नेताओं की सपंत्ति दिन दूनी-रात चौगुनी बढ़ती ही जा रही है. इसका खुलासा नेताओं द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए गए शपथ पत्र में हो रहा है।

विधानसभा चुनाव के दौरान शपथ पत्र में नेताओं ने अपनी संपत्ति का जो ब्यौरा सार्वजनिक किया है। वह इस बात को साबित करने के लिए काफी है। नेतागिरी भले ही जनसेवा के लिए जानी जाती है, लेकिन हकीकत में यह काम हर हाल में मुनाफे से जुड़ा है।5 सालों में 60 फीसदी तक बढ़ी संपत्ति। देश के पांच राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी इन दिनों चुनावी शोर है। राजनेता प्रत्याशी के रूप में विभिन्न विधानसभाओं से नामांकन करवा रहे हैं। इस दौरान शपथ पत्र में वह अपनी संपत्ति का भी खुलासा कर रहे हैं।

प्रत्याशियों की तरफ से संपत्ति का जो ब्यौरा दिया जा रहा है। वह बेहद चौंकाने वाला है। दरअसल कई राजनेताओं की संपत्तियों से जाहिर होता है कि उन्होंने 5 सालों में ही 60% से ज्यादा संपत्तियां जुटाई हैं। इससे इतना तो साफ़ है की सरकारी नीतियों का जो पैसा गायब होता है वो कही न कही इनका खजाने भरने का काम करता है। 



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