भारत-जापान आर्थिक फोरम- पीएम मोदी ने साझा की 2030 और 2047 की ऊर्जा योजनाएं
टोक्यो। भारत-जापान आर्थिक फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी भाषा में संबोधन शुरू करकर दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जापान टेक्नोलॉजी का पावरहाउस है, वहीं भारत टैलेंट का पावरहाउस है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी और विकास की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी जापान यात्रा की शुरुआत बिजनेस जगत के दिग्गजों के साथ हो रही है और भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम भागीदार रहा है। उन्होंने बताया कि मेट्रो, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप्स तक हर क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग का भरोसा मजबूत रहा है। जापानी कंपनियों ने भारत में अब तक 40 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिनमें पिछले दो वर्षों में 30 बिलियन डॉलर का प्राइवेट निवेश शामिल है।
पीएम मोदी ने भारत में पिछले 11 वर्षों के दौरान हुए आर्थिक और राजनीतिक सुधारों का हवाला देते हुए कहा कि भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है और बहुत जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में है। उन्होंने बताया कि व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं, जिनमें ‘सिंगल डिजिटल विंडो’ अप्रूवल और निजी क्षेत्र के लिए संवेदनशील क्षेत्रों का खुलापन शामिल है।
उन्होंने कहा कि ऑटो, बैट्री, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, शिप-बिल्डिंग और परमाणु ऊर्जा में भारत-जापान साझेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। पीएम मोदी ने वैश्विक दक्षिण और अफ्रीका के विकास में सहयोग की भी अपील की।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत ने AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्प्यूटिंग, बायोटेक और अंतरिक्ष में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जापान की तकनीक और भारत के टैलेंट मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी और 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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